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Monday, January 1, 2018

मोदी जी आशंकित महसूस कर रहे हैं

मोदी जी आशंकित महसूस कर रहे हैं

अब संजीदा लोगों से मिलिये तो हाय - हलो के बाद जो बात चलती है वह कि मोदी जी कें काल में व्यक्तिगत आर्थिक विकास कैसा है? बात आकर खत्म होती है बस चल रहा है या बहुत अच्छा नहीं है पर। तब बात मुड़ती है तो अब कौन? राहुल ? जवाब होता है, ओह नहीं! अब बात फिर लौट कर चली आती है मोदी जी की व्यक्तिगत साख के सद्गुणों पर ओर फिर आगे बढ़ती हुई यहां तक पहुंचती है कि 2019 में क्या होगा? उत्तर भी वही संबावित होता है- आयेगे तो यही अलबत्ता सीटें कुछ कम हो जायेंगीं। हमारे बीच बहुत से लोग होंगे जिन्होंने कई चुनाव मेखे होंगे ओर प्रचार के बड़बोलेपन से हकीकत को अलग करने का हुनर जानते होंगे या सियासी ब्रैंड को बेचने वालों के चक्कर में आने से बचते होंगे और चुनाव घोषणापत्रों के विश्लेषण के बाद समझ सकते होंगे कि इनमें से क्या - क्या किया जाना संभव है वे इस हालात को भी अच्छी तरह समझते होंगे कि 2018 में देश चुनाव की गंभीर स्थिति में पहुंच गया है ओर यहां से साफ परिलक्षित हो रहा है कि 2018 के विधानसभा चुनावों में या 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी अजेय नहीं रहे जैसा कि हम लोगों ने बीते वर्ष के गुजरात चुनाव या उसके पहले के दिल्ली और बिहार के चुनावों को देखा है। गुजरात का  चुनाव भाजपा के लिये 1995 के बाद का सबसे खराब चुनाव रहा और कांग्रेसस के लिये सवोंत्तम। यही नहीं इस चुनाव ने संकेत भी दिया है कि आगे बड़ कर हमला करने ओर मोदी जी का बहुत उपयोग करने से क्या होता है। राज्यों के चुनाव में लोग अपने भावी मुख्यमंत्री को देखना, सुनना और परखना चाहते हैं , बहु परिचित मोदी जी को नहीं। अब उनके अत्यधिक उपयोग से लोग ऊब जाते हैं। यही नहीं राहुल गांधी की योग्यता के बारे में घोर निराशा पैदा करना और कांग्रेस के विशाल संगठन को इंकार करना , भाजपा की समरनीतिक भूल है और इस भूल के धुंदा में वह देख नहीं पाती कि एक नौजवान बहुत धीर-धीरे खबरों में जगह बना रहा है। इसके चलते वह नौजवान राहु गांधी अपनी पार्टी के लिये मौके ही नहीं तैयार कर रहा है बल्कि ममता बनर्जी जैसी फायर ब्रांड ओर ताकतवर नेता की  स्वीकृति भी हासिल कर रहा है। 2 जी घोटाले में सभी अभियुक्तों का छूट जाना कांग्रेस के लिये बहुत बड़े अवसर का आगाज है। बेशक, सी बी आई के विशेष कोर्ट के फेसले को उलटवाने के लिये सरकार ऊपरी अदालत में जा रही है पर इस बीच तो बात ने आग लगा ही दी। इस मुक्ति ने भाजपा के चुनाव प्रचार के आधार को ही समाप्त कर दिया है। यही नहीं कई और बातें ऐसी हैं जिससे मोदी का तिलिस्म टूटता सा नजर आ रहा है। जब चुनाव प्रचार का वक्त था ओर अच्छे दिनों का सममोहन फैल रहा था तो उसी समय दो करोड़ लोगों को रोजगार का वादा किया गया था। वह वादा पूरया नहीं हो सका। किसानों को निम्नतम समर्थन मूल्य का झांसा भी बेकार चला गया। नौजवान समुदाय जिसे मोदी से बहुत उम्मीद थी उसका मोहभंग हो चुका है। इसका स्पष्ट सबूत है देश के विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का फैलाव रुक जाना।  मोहभंग की यह स्थिति लोकतांत्रिक चुनावों में प्रतिद्वंद्वी दलों के प्रति सहानुभूति पैदा करती है और मतदाता उसकी गलतियों को माफ करने के मूड में होते हैं। कांग्रेस से हुये इसी मोहभंग का लाभ भाजपा कोभी मिला था। 

  आने वाले दिनों में राजस्थान , मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने वाले हैं। यहां दोध्रुवीय चुनाव हैं और राहुल गांधी ने अपने हमलों के बल पर नयी चुनौती खड़ी कर दी है।इसके अलावा चुनावी हिंदुत्व के मुकाबले राहुल का सेकुलर हिंदुत्व उदारवादियों और नौजवानों में ज्यादा अपील पैदा कर है और भाजपा के सैद्धांतिक एकाधिकार को चुनौती ही नहीं दें रहा है बल्कि उससे लाभ भी हासिल कर रहा है। इसके अलावा मोदी जी का भ्रष्टाचार को लेकर चुनावी अभियान चलाना और मामूरी आर्थिक विकास  नैतिक रूप से ताकतवर बनी कांग्रेस के लाभदायक होता जा रहा है। गुजरात ने गंभीर राष्ट्रीय असंतोष पर से परदा हटा दिया और यह साबित करल दिया कि अहर्निेा चुनाव प्रचारक के तोर पर उनहोंने सही नहीं किया और यही कारण है कि वे दिल्ली में आ जमे हैं और बाकी बचे समय में भ्रष्टाचार के विरुद्दा बाकी बची क्रां​ति तथा शेष आर्थिक विकास की दिशा में  कुछ ऐसा करना चाहते हैं कि हवा बदल जाय।  यह मोदी का विरोधाभास ही है कि मामूली विकास के बावजूद उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, जैसा कि वाजपेयी जी के जमाने में हो रहा था। वक्त कम है और अस्थाई मुश्किलें दूर कर मतदाताओं के सामने उपल​ब्धियां लानी होंगी। इन उपलब्यिों को 2019 के चुनाव प्रचार के लिये नहीं छोड़ना होगा। गुजरात में मोदी जी की सबसे बड़ी बूल थी कि उन्होंने भावनात्मक मसलों को उठाया और हकीकत को पड़ा रहने दिया। गुजरात में 64 प्रतिशत नौजवान रोजगार नहीं पा सके हैं। कांग्रेस की गलत काम काज ने मोदी के लिये पथ प्रशस्त किया और अब मोदी जी ने अगर ध्यान नहीं दिया तो कांग्रेस इसका लाभ उठा सकती है।   

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